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जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह का बड़ा ऐलान, 15 दिन बाद करेंगे क्षेत्र का दौरा, बेटे को चुनाव में उतारने के दिए संकेत

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पटना/मोकामा: मोकामा के विधायक और बिहार की राजनीति के चर्चित चेहरे अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक और जनसंपर्क कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि फिलहाल वे तुरंत अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा नहीं करेंगे, बल्कि लगभग 15 दिनों के बाद व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगे।
अनंत सिंह ने कहा कि जब वे क्षेत्र में जाएंगे तो पूरे विधानसभा क्षेत्र का भ्रमण करेंगे और गांव-गांव जाकर लोगों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य केवल औपचारिक दौरा करना नहीं होगा, बल्कि हर गांव और मोहल्ले में जाकर लोगों की समस्याएं समझना और उनके समाधान की दिशा में काम करना होगा।
दरअसल, अनंत सिंह हाल ही में चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल में बंद थे। इस मामले में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई, जिसके बाद वे कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर आए हैं। उनकी रिहाई के बाद से ही उनकी गतिविधियों और बयानों पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक आस्था से करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि वे सबसे पहले पटना स्थित अपने विधायक आवास से बड़हिया के प्रसिद्ध महारानी मंदिर में पूजा-अर्चना करने जाएंगे। इसके बाद वे अपने पैतृक गांव लदमा स्थित विषहरी स्थान मंदिर में भी दर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए आस्था और विश्वास का विषय है, इसलिए किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले वे ईश्वर का आशीर्वाद लेना चाहते हैं।
पूजा-पाठ के बाद उनका अधिकांश समय पटना स्थित सरकारी आवास पर ही बीतेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में वे अपने समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों से मुलाकात करेंगे और आगे की रणनीति पर विचार करेंगे।
अपने क्षेत्र में तुरंत नहीं जाने के फैसले को लेकर अनंत सिंह ने स्पष्ट कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि इस समय मोकामा और आसपास के इलाकों में खेती-किसानी का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। खासकर यह इलाका ‘टाल क्षेत्र’ के नाम से जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। इस समय फसल की कटाई का मौसम होने के कारण किसान और मजदूर अपने काम में व्यस्त हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में लोगों के बीच जाकर उनसे मुलाकात करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे उनके काम में बाधा पड़ सकती है। अनंत सिंह के मुताबिक, वे चाहते हैं कि जब वे क्षेत्र में जाएं तो लोगों को पर्याप्त समय मिल सके, ताकि वे खुलकर अपनी समस्याएं रख सकें।
उन्होंने कहा, “हम हमेशा जनता के बीच रहते हैं और आगे भी रहेंगे, लेकिन अभी का समय किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए हमने तय किया है कि करीब 15 दिन बाद क्षेत्र में जाकर लोगों से मिलेंगे, जब वे थोड़ा खाली होंगे।”
राजनीतिक दृष्टि से भी अनंत सिंह का बयान काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि संभव है कि वे अगला चुनाव खुद नहीं लड़ें और उनकी जगह उनके बेटे को चुनावी मैदान में उतारा जाए। हालांकि, उन्होंने इस पर अंतिम निर्णय जनता पर छोड़ दिया है।
अनंत सिंह ने कहा कि वे क्षेत्र में जाकर लोगों की राय लेंगे। अगर जनता चाहेगी कि वे खुद चुनाव लड़ें, तो वे इस पर विचार कर सकते हैं। लेकिन अगर लोगों की सहमति उनके बेटे के पक्ष में होगी, तो वे उसे चुनाव लड़ाने का फैसला ले सकते हैं।
उनका यह बयान मोकामा और आसपास की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकता है। खासतौर पर, अगर अनंत सिंह अपने बेटे को आगे बढ़ाते हैं, तो यह उनके राजनीतिक उत्तराधिकार की शुरुआत मानी जा सकती है।
अनंत सिंह की छवि लंबे समय से एक प्रभावशाली और जनाधार वाले नेता की रही है। उनके समर्थकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनके किसी भी फैसले का सीधा असर क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है।
वहीं, उनकी रिहाई के बाद उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कई जगहों पर उनके स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने खुद स्पष्ट कर दिया है कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं करेंगे और सही समय का इंतजार करेंगे।
बिहार की राजनीति में इस समय आगामी चुनाव को लेकर हलचल तेज है। ऐसे में अनंत सिंह का यह बयान कई राजनीतिक संकेत देता है। एक ओर जहां वे जनता से सीधा संवाद करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपने बेटे को आगे लाने का संकेत देकर उन्होंने नई राजनीतिक रणनीति की ओर भी इशारा किया है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि 15 दिन बाद जब अनंत सिंह अपने क्षेत्र में जाएंगे, तो वहां का माहौल कैसा होगा और जनता उनकी बातों पर कैसी प्रतिक्रिया देती है। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि वे खुद चुनाव लड़ते हैं या अपने बेटे को मैदान में उतारते हैं।

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